आईटीआई (ITI) क्या है? – सम्पूर्ण जानकारी

भारत जैसे विकासशील देश में शिक्षा और कौशल विकास का विशेष महत्व है। हर साल लाखों छात्र अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद रोजगार की तलाश में निकलते हैं। ऐसे में अगर किसी के पास तकनीकी कौशल (Technical Skills) हो तो उसे नौकरी पाना अपेक्षाकृत आसान हो जाता है। यही कारण है कि सरकार ने युवाओं को तकनीकी शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण देने के लिए ITI यानी Industrial Training Institute की स्थापना की है।

आईटीआई युवाओं को विभिन्न ट्रेड (Trades) जैसे इलेक्ट्रिशियन, फिटर, वेल्डर, मैकेनिक, कंप्यूटर ऑपरेटर, फैशन डिजाइन, स्टेनोग्राफी, आदि में प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाता है।


आईटीआई का पूरा नाम और उद्देश्य

आईटीआई का पूरा नाम Industrial Training Institute (औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान) है।
इसका मुख्य उद्देश्य है –

  • युवाओं को रोजगार उन्मुख शिक्षा देना।

  • उद्योग और कारखानों की ज़रूरतों के हिसाब से तकनीकी स्किल विकसित करना।

  • बेरोजगारी को कम करना।

  • छात्रों को कम समय में रोजगार योग्य बनाना।


आईटीआई में प्रवेश (Eligibility)

ITI में प्रवेश लेना काफी आसान होता है।

  • शैक्षणिक योग्यता: न्यूनतम 8वीं, 10वीं या 12वीं पास। (यह ट्रेड के अनुसार बदल सकता है)

  • आयु सीमा: सामान्यत: 14 से 40 वर्ष तक।

  • प्रवेश प्रक्रिया: ज्यादातर राज्यों में मेरिट लिस्ट या Entrance Exam के आधार पर प्रवेश मिलता है।


आईटीआई कोर्स की अवधि

ITI कोर्स की अवधि (Duration) अलग-अलग ट्रेड के अनुसार होती है –

  • 6 महीने से लेकर 2 साल तक

  • कुछ शॉर्ट टर्म कोर्स भी उपलब्ध हैं जो 3-6 महीने के होते हैं।


आईटीआई के प्रमुख ट्रेड्स (Trades)

आईटीआई में कई ट्रेड्स होते हैं जिन्हें छात्र अपनी रुचि के अनुसार चुन सकते हैं। कुछ लोकप्रिय ट्रेड्स हैं –

  1. तकनीकी (Technical) ट्रेड्स

    • इलेक्ट्रिशियन

    • फिटर

    • वेल्डर

    • मोटर मैकेनिक

    • प्लम्बर

    • टर्नर

    • वायरमैन

  2. गैर-तकनीकी (Non-Technical) ट्रेड्स

    • कंप्यूटर ऑपरेटर एंड प्रोग्रामिंग असिस्टेंट (COPA)

    • स्टेनोग्राफी (हिंदी/अंग्रेज़ी)

    • फैशन डिजाइनिंग

    • हेल्थकेयर असिस्टेंट

    • बेसिक कॉस्मेटोलॉजी


आईटीआई करने के फायदे

आईटीआई करने के कई लाभ हैं, जिनमें से प्रमुख हैं –

  1. कम समय में रोजगार – अन्य कोर्स की तुलना में ITI कोर्स जल्दी पूरे हो जाते हैं।

  2. कम फीस – ITI की फीस बहुत कम होती है, जिससे हर वर्ग का छात्र इसे कर सकता है।

  3. सरकारी और प्राइवेट नौकरी – ITI के बाद छात्र को रेलवे, BHEL, ONGC, इंडियन आर्मी, पुलिस, बिजली विभाग आदि में नौकरी के अवसर मिलते हैं।

  4. स्वरोजगार का मौका – ITI करने के बाद छात्र अपना खुद का गैरेज, वर्कशॉप, इलेक्ट्रॉनिक रिपेयरिंग सेंटर आदि खोल सकते हैं।

  5. विदेश में अवसर – तकनीकी ट्रेड्स वाले छात्रों को विदेशों में भी अच्छी नौकरियां मिल सकती हैं।


आईटीआई के बाद करियर विकल्प

ITI करने के बाद छात्रों के पास कई करियर विकल्प होते हैं –

  1. सरकारी नौकरी

    • रेलवे

    • भारतीय सेना (Army)

    • नौसेना (Navy)

    • BSF, CRPF

    • बिजली विभाग

    • PWD

    • PSUs (BHEL, ONGC, NTPC आदि)

  2. प्राइवेट सेक्टर

    • मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां

    • ऑटोमोबाइल सेक्टर

    • कंस्ट्रक्शन कंपनियां

    • आईटी कंपनियां (कंप्यूटर ट्रेड वाले छात्रों के लिए)

  3. उच्च शिक्षा (Higher Studies)

    • ITI के बाद छात्र पॉलीटेक्निक (Diploma) में दाखिला ले सकते हैं।

    • चाहें तो एप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग (Apprenticeship) कर सकते हैं।

    • NIOS के जरिए 10वीं-12वीं भी पूरी कर सकते हैं।

  4. स्वरोजगार (Self-Employment)

    • इलेक्ट्रिशियन अपना सर्विस सेंटर खोल सकता है।

    • वेल्डर अपनी वर्कशॉप चला सकता है।

    • कंप्यूटर ऑपरेटर खुद का साइबर कैफे या ट्रेनिंग सेंटर शुरू कर सकता है।


आईटीआई की फीस

आईटीआई की फीस बहुत ही कम होती है –

  • सरकारी ITI में: 1,000 – 10,000 रुपये (कोर्स पर निर्भर)

  • प्राइवेट ITI में: 10,000 – 50,000 रुपये तक

इस वजह से यह गरीब और मध्यमवर्गीय छात्रों के लिए बेहद उपयोगी विकल्प है।


आईटीआई करने वाले छात्रों की सैलरी

ITI करने के बाद सैलरी इस बात पर निर्भर करती है कि आप सरकारी नौकरी करते हैं, प्राइवेट सेक्टर में हैं या स्वरोजगार कर रहे हैं।

  • सरकारी नौकरी – शुरुआती सैलरी 20,000 – 40,000 रुपये प्रतिमाह।

  • प्राइवेट नौकरी – 12,000 – 25,000 रुपये प्रतिमाह।

  • विदेशों में नौकरी – 60,000 रुपये से 1 लाख रुपये तक।

  • स्वरोजगार – इसमें कमाई की कोई सीमा नहीं होती।


आईटीआई क्यों चुनें?

  • पढ़ाई में सामान्य छात्र भी आसानी से कर सकता है।

  • प्रैक्टिकल ज्ञान ज्यादा होता है।

  • रोजगार की गारंटी।

  • सरकारी योजनाओं जैसे “Skill India Mission” और “Make in India” में ITI पास युवाओं को विशेष लाभ।


निष्कर्ष

आज के दौर में केवल डिग्री लेकर नौकरी पाना मुश्किल होता जा रहा है। ऐसे में ITI (औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान) युवाओं को रोजगार योग्य बनाता है और उन्हें तकनीकी स्किल देता है। ITI का सबसे बड़ा फायदा है कि कम समय और कम खर्च में छात्र नौकरी के साथ-साथ स्वरोजगार के लिए भी तैयार हो जाते हैं।

जो छात्र जल्दी से नौकरी पाना चाहते हैं, उन्हें ITI ज़रूर करना चाहिए। यह न सिर्फ बेरोजगारी को कम करता है बल्कि आत्मनिर्भर भारत के सपने को भी साकार करता है।


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आईटीआई (ITI) क्या है? – सम्पूर्ण जानकारी

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 '5' अभिधारणा एवं इसके प्रयोग
5 'S' Concepts and Its Applications


5 s  अभिधारणा एक जापानी (Japanese) शब्दों का समाकलन है। इसके अन्तर्गत मैनेजमेण्ट तथा कर्मचारी के सहयोग द्वारा कार्यस्थल, मशीन, उपकरण आदि का उचित रख-रखाव तथा सुरक्षित रहकर कार्य किया जाता है। ४ अभिधारणा को निम्नलिखित पाँच चरणों में पूरा किया जाता है



A  . Seiri (Sort)
B . Seiton (Set in order)
C . Seiso (Shine) 
D . Seiketsu (Standardise)
E . Shitauke (Sustain)


A  ). छँटनी Sort


(1 ) यह s  5 's ' का पहला  s  है।

यह उन अनावश्यक मदों (items) को कार्य प्रणाली से अलग करता है, जो वर्तमान उत्पादन की दृष्टि से आवश्यक नहीं है।                                                                                                                                                        (2 ) इसे रेड टैगिंग के नाम से भी जाना जाता है।                                                                                                (3) संगठनों को सॉर्टिंग से कई फायदे हैं जैसे-बहुमूल्य फ्लोर क्षेत्र की प्राप्ति एवं टूटे हुए उपकरण रद्दी एवं अतिरिक्त कच्चे मालों की विलुप्ति आदि।

B. क्रम निर्धारण Set in Order

1) यह विधि सभी मदों को उचित रूप में व्यवस्थित करती है, ताकि सरलता के साथ उनकी लेबलिंग की जा सके। 2 ) यह विधि तभी कामयाब हो सकती है, जब 5's ' के प्रथम स्तम्भ समय-समय पर उत्पन्न होती हैं, जो कार्य व्यवधान, यहाँ तक की दुर्घटना सॉर्ट के द्वारा अनावश्यक मद कार्यक्षेत्र से अलग कर लिए गए हो।                     3 ) सतहों को रंगना, लेबल स्थापित करना, कार्यक्षेत्र एवं स्थानों की रूपरेखा तैयार करना आदि सैट इन ऑर्डर विधि के अन्तर्गत आते हैं।

C. चमकाना Shine

1 ) यह विधि कार्यक्षेत्र एवं सभी मशीनों के स्वच्छीकरण विधि से सम्बन्धित है।                                               2  ) स्वच्छ वातावरण में कार्य करने से कार्यकर्मी किसी यन्त्र मे हुई खराबी को आसानी से देख एवं समझकर उसका निवारण कर सकते हैं।                                                                                                                          3 ) संगठन प्रायः साइन स्तम्भ को प्रारम्भ करने से पहले साइन लक्ष्य, असाइनमेण्ट, विधियों एवं उपकरणों आदि को स्थापित करते हैं।

 D) मानकीकरण standardise

 5 'S ' के सभी तीनों स्तम्भों को लागू करने के बाद अगला स्तम्भ मानकीकरण है, जिसके अन्तर्गत कार्यक्षेत्र में एक सर्वोत्तम प्रक्रिया का मानकीकरण किया जाता है।                                                                                    (1 ) इस विधि के अन्तर्गत उस प्रक्रिया का मानकीकरण किया जाता है.                                                            (2 ) इस विधि के अन्तर्गत तीन चरण शामिल होते हैं-                                                                                      (a ) 5's ' (सॉर्ट, सैट इन ऑर्डर, साइन) की कार्य जिम्मेदारी प्रदान करना।                                                           (b) 5's ' कार्यों को एक नियमित कार्य के रूप में समाकलित (integrated) करना।                                                 (c) 5 s को कायम रखने के लिए नियमित जाँच करना।


E . कायम रखना Sustain

6 यह सबसे कठिन 's ' है, जिसका उद्देश्य है-उचित रूप से सही विधियों एवं प्रक्रियाओं को कायम रखना। 

(ii) यह विधि नई वर्तमान स्थिति एवं संगठन के कार्यक्षेत्र मानक को परिभाषित करने के प्रति केन्द्रित होती है।

(iii) इस स्तम्भ के बिना बाकी सारे स्तम्भों की उपलब्धियां ज्यादा दिनों तक नहीं रह पाती हैं। इस स्तम्भ के लिए कई उपकरण प्रयोग किए जाते हैं, जो निम्नलिखित हैं 

(a) संकेत एवं पोस्टर,      (c) प्रदर्शन समीक्षा तथा

(b) समाचार-पत्र,            (d) विभागीय भ्रमण।


 आपातकालिक प्रतिक्रियाएँ Response to Emergencies 

औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में कार्यशाला एक ऐसा कार्यक्षेत्र है, जहाँ पर प्रतिक्षण विविध प्रकृति के प्रक्रम चलते रहते हैं। इस दौरान ऐसी स्थितियाँ जैसी अवस्थाएँ बना देती है। अतः कार्यशाला में होने वाली आपातकालीन प्रतिक्रिया के निम्न तीन मुख्य कारण हो सकते हैं


1. शक्ति विफलता
2. आग पकड़ना
 3. प्रणाली विफलता


उपरोक्त सभी कारणों का विस्तृत विवरण निम्न प्रकार है


1. शक्ति विफलता Power Failures


कार्यशाला में विद्युत शक्ति की विफलता सामान्य आपातकालिक स्थिति है। इस दौरान प्रशिक्षु की प्रतिक्रियाएं निम्नानुसार होनी चाहिएँ


(i) आपातकालीन स्थिति में पावर सप्लाई के विफल (failure) होने की दशा में पावर स्टेशन पर सम्बन्धित व्यक्ति से सम्पर्क करें।

what is 5 'S' process Concepts and Its Applications